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तटीय आर्थिक क्षेत्रा

  • महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह पर भारत का प्रथम मेगा आर्थिक क्षेत्रा की स्थापनों को मंजूरी प्रदान की गई।
  • अभी हाल में नीति आयोग ने भारत में शेन्जेग ;चीनद्ध की तर्ज पर तटीय आर्थिक क्षेत्रा बनाने की सिपफारिश की है। इस क्षेत्रा के आर्थिक विकास के लिए केन्द्र सरकार उन्हें कर में बहुत छूट देगी।
  • नीति आयेाग ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों असपफलता को नज़रदाज कर दिया है, विशेष आर्थिक क्षेत्रा नीति के अनुकूल नहीं था और विपफल हो गए।
  • नीति आयोग का इसके पीछे उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बड़े उत्पादकों को आर्कषित करना।
  • भारत जैसे सस्ते श्रम वाले देश में उत्पादकों को विशेष क्षेत्रा के नाम विशेष छूट देने के नुकसान का एहसास जब उपभोगता को होगा तब वे अवश्य ही इन क्षेत्रों का विरोध् करेंगे।

सागरमल कार्यक्रम के बारे में

  • तटीय आर्थिक क्षेत्रा पूणे, मुबई, ठाणे नासिक क्षेत्रों में विस्तारित होगा।
  • यह सागर माला राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके अन्तर्गत 14 ब्मर्् ;मेगा क्षेत्राद्ध स्थापित होगा।
  • यह तटीय बंदरगाह और शहर के विकास संबंध्ी योजना है। जिसके तहत 75,00 कि.मी. लम्बे समुंद्र तट 14,500 कि.मी. नौवहन योग्य जलमार्ग का रणनीति का लाभ उठाना है।
  • सागरमाला कार्यक्रम सहकारी संघवाद के मूलय दर्शन से प्रेरित है।

बंदरगाह आधरित उद्योग

  • बंदरगाह के निर्माण से ऊर्जा, थोक सामग्री जैसे उद्योग, के लिए पृथक विनिमार्ण इकाइयों की स्थापना होगी।
  • इसके तहत मछुआरों का विकास, बंदरगाह आधरित को समर्थन देने को केन्द्रीय कोशल को विकास करना।
    तटीय आर्थिक क्षेत्रा बंदरगाह वदमद्ध
  • इसकी कल्पना स्थानीय आर्थिक क्षेत्रा के तहत की गई है जिसे तटरेखा 300-500 किमी. तक और तटरेखा लगभग 200-300 किमी. क्षेत्रों तक विस्तारित किया जा सकता है।
  • ब्मर्् के निवेशकों को ईज आॅपफ डूइग बिजनेस सहित व्यवसाय के अनुकूल परिस्थितिकी तंत्रा प्राप्त होगा।
  • दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा, चेन्नई-विजाग औद्योगिक गलियारा का लाभ करने हेतु आर्थिक क्षेत्रों की परिकल्पना की गई है।

बंदरगाह से लाभ

  • तटीय आर्थिक क्षेत्रा के तहत बड़ी विदेशी कम्पनियों को आकर्षित किया जाएगा। विदेशी कम्पनीयों के भारत में आगमन से पूंजी, प्रौद्योगिकी उचित प्रबंध्न और विश्व बाजार से सम्पर्क सुधर होगा।
  • तटीय आर्थिक क्षेत्रा के द्वारा निर्यात संचालित तटीय अर्थव्यवस्था के द्वारा रोजगार में वृद्धि।
  • इसके द्वारा उत्पादक क्लस्टर छोटी एवं मध्यम कंपनियां विकसित होगी।

भविष्य

  • भूमि संसाधन अध्ग्रिहण और मुआवजें की अत्यध्कि लागत तथा राज्यों के पास भूमि की अनुपलब्ध्ता के कारण परियोजना का कार्यन्वयन से देर होगी।
  • विभिन्न प्रकार के एजेंसियों की भागीदारी, देश भर में औद्योगीकरण, व्यापार, पर्यटन और परिवहन को बढ़ावा देने के लिए अवसंरचना दृष्टिकोण।
  • प्रमुख और गैर-प्रमुख बंदरगाह के लिए मूलभूत सुविधओं के अभाव, परिवहन, तटीय और अर्तंदेशीय नौवहन की कम पहुंच तथा बंदरगाह की कम गहराई के साथ निम्न पहन क्षमता का विकास।