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नोर्थ ईस्ट स्टैट्स

पूर्वोत्तर भारत से आशय भारत के सर्वाधिक पूर्वी क्षेत्रों से है जिसमें एक साथ जुड़े ‘सात बहनों’ के नाम से प्रसिद्ध राज्य, सिक्किम तथा उत्तरी बंगाल के कुछ भाग (दार्जीलिंग, जलपाईगुड़ी और कूच बिहार के जिले) शामिल हैं। पूर्वोत्तर भारत सांस्कृतिक दृष्टि से भारत के अन्य राज्यों से कुछ भिन्न है। भाषा की दृष्टि से यह क्षेत्र तिब्बती-बर्मी भाषाओँ के अधिक प्रचलन के कारण अलग से पहचाना जाता है। इस क्षेत्र में वह दृढ़ जातीय संस्कृति व्याप्त है जो संस्कृतीकरण के प्रभाव से बची रह गई थी।
उत्तरपूर्वीय भारत की जलवायु मुख्यतः नम अर्ध-ऊष्णकटिबंधीय है और ग्रीष्मकाल गर्म व उमस भरा होता है तथा अत्यधिक वर्षा होती है और हलकी ठण्ड पड़ती है। भारत के पश्चिमी तट के साथ साथ, इस क्षेत्र में भी भारतीय उपमहाद्वीप के कुछ बचे हुए वर्षा वन स्थित हैं। अरुणांचल प्रदेश और सिक्किम राज्यों की पर्वतीय जलवायु ठंडी हिमाच्छादित सर्दियों के साथ हलकी गर्म है।
ब्रिटिश साम्राज्यवाद के परिणामस्वरूप उत्तरपूर्वीय राज्यों का अलगाव तब ही से शुरू हो गया था जब इस क्षेत्र को अपने पारंपरिक व्यवसायिक भागीदारों (भूटान, म्यांमार और भारत-चीन) से अलग किया जाने लगा था।
1947 में भारतीय स्वतंत्रता और विभाजन ने इस एकाकी क्षेत्र को भंग करते हुए इसे एक स्थलसीमा क्षेत्र बना दिया जिसे देरी से पहचाना गया, किन्तु अभी तक इस पर अध्ययन नहीं किया जा सका है।शीघ्र ही यह मुख्याधारा के भारत के लिए एक आबद्ध बाज़ार बन गया। उत्तरपूर्वीय राज्यों में मतदाताओं का तुलनात्मक प्रतिशत कम है (भारत की कुल जनसंख्या का 3.8 प्रतिशत) इसलिए उन्हें लोक सभा की कुल 543 सीटों में से मात्र 25 सीटें (कुल सीटों का 4.6 प्रतिशत) ही आवंटित की जाती हैं। उत्तरपूर्वीय राज्य कई जातीय समूहों की गृहभूमि हैं जो स्व-रक्षण में लगे हुए हैं।हाल के समय में, इनमे से कुछ संघर्षों ने हिंसक रूप ले लिया जिसके फलस्वरूप उल्फा (ULFA), एनएलएफटी (NLFT), एनडीएफब(NDFB) और एनएससीएन (NSCN) जैसे सशस्त्र विद्रोही समूहों का प्रसार होने लगा. 1962 के भारत-चीन युद्ध के शीघ्र बाद ही और विशेष रूप से क्षेत्र में विद्रोह उठने के बाद, यहां नियमों में सुरक्षा प्रभाव बढ़ा दिये गए हैं।कुछ समय से इस क्षेत्र के नियम निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों के बीच इस तथ्य को व्यापक स्तर पर मान्यता दी गयी है कि उत्तरपूर्वीय क्षेत्र के विकास में अवरोध का प्रमुख कारण इसकी भौगोलिक अवस्थिति है। वैश्वीकरण के आने के फलस्वरूप विक्षेत्रीकरण और सीमारहित विश्व की धारणा का प्रसार हुआ है जिसको प्रायः आर्थिक एकीकरण के साथ जोड़ा जाता है। इसकी सीमा का 98 प्रतिशत भाग चीन, म्यांमार, भूटान, बांग्लादेश और नेपाल के साथ होने के कारण वैश्वीकरण के युग में उत्तरपूर्वीय भारत में विकास की संभावनाएं अधिक हैं। परिणामस्वरूप, बुद्धिजीवियों और राजनीतिज्ञों के बीच एक नयी नीति विकसित हुई कि एक मात्र दिशा जिसकी ओर उत्तरपूर्वीय क्षेत्र को अभिमुख होना चाहिए, वह यह है कि शेष भारत के साथ राजनीतिक एकीकरण और शेष एशिया, विशेषकर पूर्व और दक्षिणपूर्व एशिया के साथ आर्थिक एकीकरण के द्वारा ही विकास के नए मार्ग खुलेंगे क्योंकि शेष भारत से आर्थिक एकीकरण के फलस्वरूप कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं हुआ है। इस नयी नीति के विकास के साथ भारत सरकार ने उत्तरपूर्वीय क्षेत्र के विकास के लिए लुक ईस्ट पॉलिसी घोषित कर दी है। इस पॉलिसी का जिक्र बाह्य मामलों के मंत्रालय की 2004 की वर्षांत समीक्षा में है, जिसमें कहा गया है कि: “भारत की लुक ईस्ट पॉलिसी को अब यूपीए (UPA) सरकार द्वारा नए आयाम दिए गए हैं। विशेषकर अपने पूर्वीय ओर उत्तरपूर्वीय क्षेत्र के लिए, बीआईएमएसटीइसी (BIMSTEC) में और भारत-एएसइएएन (ASEAN) शिखर वार्ता द्वारा, दोनों को अर्थव्यवस्था और सुरक्षा हितों के लिए अनिवार्य रूप से जोड़ते हुए, अब भारत एएसइएएन (ASEAN) देशों के साथ साझेदारी की ओर विचार कर रहा है।”इन आठ राज्यों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 1971 में पूर्वोतर परिषद (नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल / NEC)का गठन एक केन्द्रीय संस्था के रूप में किया गया था। नॉर्थ ईस्टर्न डेवेलपमेंट फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड (NEDFi)का गठन 9 अगस्त 1995 को किया गया था और उत्तरपूर्वीय क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) का गठन सितम्बर 2001 में किया गया था।कैबुल लम्जाओ नेशनल पार्क मणिपुर राज्य के विष्णुपुर जिले में स्थित एक राष्‍ट्रीय उद्यान है. यह 40 वर्ग कि.मी. के क्षेत्रफल वाला विश्व में इकलौता तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है और मणिपुर की विश्व प्रसिद्ध लोकताक झील का एक अभिन्न हिस्सा है.काजीरंगा नेशनल पार्क मध्य असम में बसा पूर्वोत्‍तर भारत के अंतिम छोर का ऐसा पार्क है, जहां इंसान नहीं रहते. 430 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला यह पार्क एक सींग वाले गैंडे का सबसे बड़ा आवास है.जीरो….हम्‍म….ये नाम आपको सुनने को अजीब जरूर लगेगा, लेकिन यह अरुणाचल प्रदेश में स्थित एक शहर का नाम है, जोकि ईटानगर से तकरीबन 167 कि.मी की दूरी पर है. यह एक बेहद ही खूबसूरत जगह है. यहां अमूमन तापमान जीरो से कम ही रहता है.गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या देवी का मंदिर नीलांचल पहाड़ियों पर है. कामाख्या देवी का मंदिर 51 शक्ति पीठों में शुमार है. पौराणिक सत्य है कि अम्बूवाची पर्व के दौरान मां भगवती रजस्वला होती हैं और मां भगवती की गर्भ गृह स्थित महामुद्रा (योनि-तीर्थ) से निरंतर तीन दिनों तक जल-प्रवाह के स्थान से रक्त प्रवाहित होता है.मेघालय की राजधानी शिलांग में स्थित स्वीट फॉल इस शहर का सबसे खूबसूरत वॉटरफॉल माना जाता है. लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि ये वॉटरफॉल हॉन्टेड है. मेघालय में सबसे ज्यादा खुदकुशी और मौत की घटनाएं इसी वॉटरफॉल में हुई हैं.अगर त्रिपुरा के उत्कृष्ट वास्तुशिल्पीय निर्माण की बात की जाए तो उसमें अगरतला के उज्जयंता महल का नाम सबसे पहले आएगा. फिलहाल इसका इस्तेमाल राज्य की विधानसभा के रूप में किया जा रहा है|