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भूगोल (वैकल्पिक विषय)

फीस –  30,000/-

पंजीकरण –  10,000/-

 

 

सामान्य अध्ययन का सिविल सेवा परीक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान है। अतः वैकल्पिक विषय ऐसा होना चाहिए जो हमें सामान्य अध्ययन की तैयारी में भी मदद करे। इसके अलावा निबंध का महत्व, पठन सामग्री की उपलब्धता और अंकदायी प्रकृति का भी ध्यान रखना चाहिए।
इस परिप्रेक्ष्य में अगर हम भूगोल का वैकल्पिक विषय के रूप में परीक्षण करें तो कई तथ्य सामने आते हैं। जैसे विद्यालयों स्तर पर एक मूल विषय होता है। अतः हम सबकी भूगोल में एक पृष्ठभूमि होती है।

भूगोल के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि इसके पहले पत्र की प्रकृति विज्ञान की तरह है। इसकी विषय -वस्तु सिर्फ सामान्य समझ की मांग करती है। इसका द्वितीय पत्र थोड़ा तथ्यात्मक होता है पर प्रथम पत्र में विशेषता द्वितीय पत्र को सरल बना देती है।
वर्तमान दौर में भूगोल सामान्य अध्ययन के लिए सर्वाधिक प्रासंगिक है। प्रारंभिक परीक्षा में लगभग 20 प्रतिशत प्रश्न भूगोल से होते है। साथ ही पारिस्थितिकी, पर्यावरण व जैव-विविधता भी भूगोल से संबंधित हैं। बात अगर मुख्य परीक्षा की करें तो सामान्य अध्ययन के प्रथम पत्र में औसतन 100 अंक के प्रश्न भूगोल से जुडे़ हैं। इसके अलावा सामान्यतया निबंध के प्रश्नपत्र में एक प्रकरण पर्यावरण, आपदा-प्रबंधन आदि से नियमित पूछे जाते हैं।

समसामायिकी इत्यादि से जुडे़ ज्वलंत मुद्दे जैसे मानव विकास, कृषि , प्राकृतिक संपदा, उद्योग आदि सारे अध्ययन और निबंध में अत्यधिक उपयोगी हैं, पर अंततः भूगोल का ही अंग है।
भूगोल के बिना अन्य विषयों में विशेषज्ञता शायद ही संभव हो। अगर आपको भूगोल का ज्ञान है (जैसे प्राकृतिक संपदा की उपलब्धता, जनसंख्या घनत्व, जलवायु आदि) तो आप अंतर्राष्ट्रीय संबंध व भारत के राज्यों की स्थिति जैसे विषयों को आसानी और अच्छे से समझ सकते हैं।
यह सर्वमान्य है कि भूगोल एक अंकदायी विषय है। वैज्ञानिकी अभिमुखता के कारण इसकी अंकदायी प्रकृति गणित और विज्ञान की तरह है। नक्शों पर आधारित प्रश्न अच्छे अंक लाने की संभावना को और प्रबल कर देते हैं। साथ ही इसकी समकालीन प्रकृति इसके उत्तरों को समसामायिकी से अंलकृत करने योग्य बनाती है।